काफी लंबे समय से हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ को राजनीतिक प्राथमिकता नहीं माना गया है। अब समय आ गया है कि हम यह स्वीकार करें कि एक समृद्ध भारत का निर्माण संघर्ष कर रहे कृषि क्षेत्र की नींव पर नहीं किया जा सकता।

""We cannot build a prosperous Uttar Pradesh while our farmers continue to struggle for dignity, fair prices, and economic security.""— देवेश कुमार पिंटू
हमारे राज्य का वर्तमान कृषि परिदृश्य कई विरोधाभासों से भरा हुआ है। एक ओर हम गन्ना और गेहूं के रिकॉर्ड उत्पादन पर गर्व करते हैं, वहीं दूसरी ओर औसत किसान का कर्ज़ बोझ लगातार चिंताजनक रूप से बढ़ रहा है। यह विरोधाभास प्रकृति की कोई दुर्घटना नहीं है, बल्कि दशकों की गलत नीति-निर्माण का परिणाम है, जिसमें शहरी औद्योगिक विकास को प्राथमिकता दी गई और ग्रामीण हृदयस्थल को केवल सब्सिडी देकर छोड़ दिया गया।
“हमें ऐसे संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता है जो किसान को संपत्ति और समृद्धि बनाने में सक्षम बनाएं।”
Azad Samaj Party का दृष्टिकोण—जैसा कि हमारे नवीनतम नीति प्रारूप में प्रस्तुत किया गया है—जीविका से समृद्धि की ओर ध्यान केंद्रित करता है। हम ब्लॉक स्तर पर विकेन्द्रीकृत कृषि-प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना का प्रस्ताव रखते हैं। कच्चे उत्पादों को स्रोत के निकट ही संसाधित करके हम कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम कर सकते हैं और यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि मूल्य संवर्धन ग्रामीण अर्थव्यवस्था के भीतर ही हो, जिससे स्थानीय रोजगार पैदा होगा और किसानों का लाभ मार्जिन बढ़ेगा।
न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की भूमिका
MSP की कानूनी गारंटी केवल एक आर्थिक मांग नहीं है, बल्कि एक नैतिक अनिवार्यता है। जब एक फैक्ट्री मालिक अपने उत्पाद की कीमत तय कर सकता है, तो यह अन्याय है कि किसान को अस्थिर बाजार के हवाले छोड़ दिया जाए। MSP की हमारी प्रतिबद्धता, साथ ही 20% राज्य बोनस, ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तत्काल तरलता (liquidity) लाने के लिए बनाई गई है।